{"product_id":"manushaya-kaun-hai","title":"Manushaya Kaun Hai?","description":"\u003cp\u003eISBN: 9788169980272\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eAuthor: Manas Jilay Singh\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eYear of Publication: Sep’ 2026\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eBinding: PB\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eLanguage: Hindi\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eNo. of Pages: 356\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e \u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e \u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eABOUT THE BOOK : \u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eमनुष्य कौन है? - एक आमंत्रण... स्वयं को जानने का\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e“कुछ पुस्तकें जानकारी देती हैं; कुछ दृष्टि देती हैं। यह पुस्तक आपको स्वयं से मिलने की यात्रा पर ले जाती है।” क्या मनुष्य केवल शरीर, मन, बुद्धि और सामाजिक पहचान है या उसके भीतर ऐसी चेतना भी है जो स्वयं को जान सकती है? “मनुष्य कौन है?” इसी मूल प्रश्न से आरम्भ होकर पाठक को एक विकासात्मक चेतना-यात्रा पर ले जाती है, जहाँ प्रत्येक अध्याय अगले अध्याय की दार्शनिक आधारभूमि निर्मित करता है। यह पुस्तक उत्तरों का संग्रह नहीं बल्कि प्रश्न से प्रज्ञा तक चेतना के क्रमिक विकास की एक अखण्ड दार्शनिक यात्रा है। आत्म-अवलोकन से आत्मबोध, आत्मबोध से समत्व और समत्व से जीवन-दृष्टि तक चेतना के क्रमिक विकास का समन्वित प्रतिमान प्रस्तुत किया गया है। यह कृति पाठक को केवल सोचने नहीं बल्कि स्वयं को देखने, समझने और रूपांतरित करने के लिए आमंत्रित करती है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eABOUT THE AUTHOR :\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eमानस जिले सिंह यथार्थवादी चिंतक, स्वतंत्र दार्शनिक एवं लेखक हैं। वे साक्षी योग, मानस पंथ और मोक्ष पथ के संस्थापक हैं। वास्तुकला एवं इंटीरियर डिजाइन के क्षेत्र में दो दशकों से अधिक के व्यावहारिक अनुभव ने उनके चिंतन को रचनात्मकता, सौंदर्यबोध और जीवन की व्यावहारिक समझ से समृद्ध किया है। इसी अनुभव को उन्होंने दार्शनिक दृष्टि के साथ जोड़कर जीवन, चेतना और अस्तित्व को समझने का अपना विशिष्ट दृष्टिकोण विकसित किया है। उनके लेखन एवं शोध का केंद्र भारतीय दर्शन, चेतना – अध्ययन तथा जीवन- केंद्रित दर्शन के विविध आयाम हैं। उनका चिंतन पारंपरिक मान्यताओं को केवल स्वीकार करने के बजाय उन्हें अनुभव, तर्क और यथार्थ की कसौटी पर परखने का प्रयास करता है। प्रस्तुत पुस्तक उनकी प्रस्तावित पाँच पुस्तकीय समग्र दार्शनिक श्रृंखला का प्रथम खंड है, जिसमें वे जीवन, चेतना और मनुष्य के अस्तित्व से जुड़े प्रश्नों को एक स्वतंत्र एवं समकालीन दार्शनिक दृष्टि से देखने का प्रयास करते हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Motilal Banarsidass International","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":51377101176999,"sku":null,"price":525.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0343\/1507\/5715\/files\/image_4862d145-3de0-4e28-afeb-3de5280f9ac3.png?v=1789993775","url":"https:\/\/mlbdbook.com\/products\/manushaya-kaun-hai","provider":"Motilal Banarsidass International","version":"1.0","type":"link"}