ISBN: 9789348911728
Author: Papia Bhattacharya
Year of Publication: Jan'2026
Binding: PB
Language: Hindi
No. of Pages: 108
यह ग्रन्थ लिखने के लिए अनेक घटनाओं से मुझे प्रेरणा मिली है। बाल्यकाल से ही आध्यात्मिक जगत के प्रति मेरा आकर्षण उत्पन्न हुआ था। घर का उच्च आध्यात्मिक वातावरण और माँ, पिताजी का ईश्वर के प्रति अत्यन्त प्रेम (अनुराग) शैशव (शिशुकाल) से बड़े होते हुए मेरे मन को बहुत ही प्रभावित किया था। पाठ्य पुस्तकों के साथ-साथ अनेक धार्मिक ग्रन्थों को पढ़ने का मेरा अभ्यास था। वृन्दावन के प्रति मेरा आकर्षण बचपन से ही था।
कल्याणी में निवास करते समय स्कूल जीवन समाप्त कर कल्याणी विश्वविद्यालय के अन्तर्गत कांचरापाड़ा महाविद्यालय (कॉलेज) से स्नातक डिग्री में समाप्त की। इसके बाद रवीन्द्र संगीत में स्नातकोत्तर डिग्री की। विवाहसूत्र से इलाहाबाद में निवास करते समय माँ, पिताजी को लेकर वृन्दावन धाम दर्शन करने का अवसर हुआ था मुझे, किन्तु वह केवल भूमिस्पर्श करने जैसी घटना थी।
इसके बाद कुछ दिनों का समय निकाल कर उच्चकोटि के सिद्ध साधिका राधिकाजी साधी का पुरी या जटावाली माँ के आमंत्रण से और उनके स्नेहपूर्ण मेहमान नवाजी के साथ उनके सिद्ध आश्रम में रहकर वृन्दावन दर्शन का जो उपलब्धि मुझे हुआ उसे ग्रन्थ के रूप में लिखना मुझे आवश्यक लगा।
भक्त पाठक जब यह पुस्तक पढ़ेंगे तो वे भी मेरी उपलब्धियों के माध्यम से वृन्दावन का मानस भ्रमण करके आध्यात्मिक आनन्द प्राप्त कर सकें – मेरी तरफ से यह आशा रखती हूँ। मैं यह भी आशा रखती हूँ कि इस ग्रन्थ पाठ, समस्त पाठकों के हृदय में ईश्वर, अनुराग और देव आनन्द लाभ होगा।